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अच्छी खेती-बारी करनी है तो बारिश शुरू होने से पहले खेतों की कर ले मेढ़बंदी, फसलों की पैदावार होगी अधिक

खरीफ मौसम में खेती-बारी में जुटे किसानों को मानसून से पहले मेढ़बंदी की सलाह कृषि पदाधिकारी दे रहे हैं. इसका फायदा के बारे में बताते हुए कहते हैं कि मेढ़बंदी से बारिश की पानी खेत में जमा होगा, तो फसलों का उत्पादन भी अधिक होगा.

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
Agriculture News: खरीफ फसल के लिए खेत को तैयार करते किसान.
Agriculture News: खरीफ फसल के लिए खेत को तैयार करते किसान.
प्रभात खबर.

Agriculture News: कम पानी में भी अच्छी खेती- बारी हो सकती है. किसान यदि बारिश की पानी का सही से प्रबंधन कर लें, तो खरीफ मौसम में जिले भर के किसान औसतन लगभग 500 मिमी वर्षा की पानी से ही अच्छी खेती-बारी कर सकते हैं. लेकिन, पानी के प्रबंधन के अभाव में अच्छी खेती-बारी के लिए जिले भर में औसतन एक हजार से भी अधिक मिमी वर्षा की आवश्यकता पड़ती है.

खरीफ फसल की तैयारी में लग गये किसान

इस संबंध में जिला कृषि पदाधिकारी अशोक कुमार सिन्हा ने कहा कि खरीफ मौसम शुरू हो गया है. किसान धान, मक्का, अरहर, उरद, मूंग, कुल्थी, ज्वार, बाजरा, मड़ुआ, मूंगफली, तिल, सोयाबीन, सूर्यमुखी, सरगुजा, अरंडी सहित अन्य दलहन एवं तेलहन फसलों की खेती-बारी की तैयारी में लग गये हैं.

खरीफ मौसम में करें विभिन्न प्रकार के फसलों की खेती-बारी

खरीफ मौसम चार महीने का रहता है. इन चार महीनों में किसान खरीफ के विभिन्न प्रकार के फसलों की खेती-बारी करते हैं. इन चार महीनों की खेती-बारी के लिए पूरे जिले भर में औसतन एक हजार से भी अधिक मिमी बारिश की जरूरत पड़ती है. चाहे तो जिले के किसान मात्र औसतन 500 मिमी वर्षा में ही खेती-बारी का काम पूरा कर सकते हैं. लेकिन इसके लिए किसानों को वर्षा जल का प्रबंधन करना होगा.

खेतों की मेढ़बंदी के हैं कई लाभ, फसलों की पैदावार भी बढ़ेगी

उन्होंने बताया कि जिले के अधिकांश किसान धान की खेती शुरू करने के समय खेतों को बनाते हैं. खेत के टूटे हुए मेढ़ को ठीक करते हैं, ताकि खेत में पानी जमा हो सके. यदि किसान बारिश के पहले ही खेतों के टूटे हुए मेढ़ को ठीक कर लें, तो इससे किसानों को अधिक लाभ होगा. खेतों का मेढ़ टूटा होने के कारण बारिश का पानी खेत में जमा नहीं हो पाता है और वह बहकर निकल जाता है. यदि बारिश से पहले ही खेतों के मेढ़ ठीक कर लिये जाते हैं तो बारिश का पानी खेत में जमा होगा. जिससे किसानों को खेती-बारी करने में सुविधा होगी.

खेती-बारी के लिए जून माह में 200 मिमी वर्षा की जरूरत

श्री सिन्हा ने बताया कि अभी तक मानसून का आगमन नहीं हुआ है. फिर भी जिले में अब तक वर्षापात की स्थिति अच्छी है. मानसून आगमन से पहले ही जिले भर में एक से 13 जून तक औसतन 4.4 मिमी बारिश हो चुकी है. यदा-कदा हो रही बारिश से जिले के किसान भी खुश हैं. प्रत्येक वर्ष 15 जून के बाद ही मानसून का आगमन होता है. मानसून के आगमन के बाद सिर्फ जून माह में पूरे जिले को खेती-बारी के लिए औसतन लगभग 200 मिमी वर्षा की जरूरत होती है. फिलहाल अभी मानसून का आगमन हुआ नहीं है. इसके बावजूद अब तक 4.4 मिमी वर्षा हो चुकी है, जो जिले में खेती-बारी के लिए एक अच्छा संकेत है.

खाद एवं रासायनिक उर्वरकों का सरकारी दर तय, अधिक मूल्य लेने पर होगी कार्रवाई

खरीफ मौसम में फसल उत्पादन के लिए किसान जैविक उर्वरकों के साथ-साथ रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग करते हैं. लेकिन, उर्वरकों का प्रयोग संतुलित मात्रा में करने की आवश्यकता होती है, ताकि गुणवत्तापूर्ण अन्न उत्पादन के साथ खेतों की उर्वरा शक्ति भी बनी रहे. इसे ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार द्वारा अनुदानित उर्वरकों का कंपनीवार प्रति बोरी अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) निर्धारित किया गया है. जिला कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार सरकार द्वारा 10 विभिन्न कंपनियों के विभिन्न किस्मों के उर्वरकों का प्रति बोरी अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) निर्धारित किया गया है.

निर्धारत दर से अधिक मूल्य पर उर्वरक मिलने पर करें शिकायत

जिला कृषि पदाधिकारी अशोक कुमार सिन्हा ने बताया कि यदि किसी भी खुदरा विक्रेता सरकार द्वारा उक्त निर्धारित दर से अधिक मूल्य पर उर्वरकों की बिक्री की जाती है, तो किसान ऐसी स्थिति में स्थानीय स्तर से लेकर राज्य स्तर तक के पदाधिकारियों से इसकी शिकायत कर सकते हैं. किसान अपने संबंधित प्रखंड के प्रखंड कृषि पदाधिकारी, जनसेवक, प्रखंड तकनीकी प्रबंधक, जिले के जिला कृषि कार्यालय तथा संयुक्त कृषि निदेशक कार्यालय रांची में इसकी शिकायत कर सकते हैं. यदि किसी विक्रेता द्वारा जबरन अनुदानित उर्वरकों के साथ गैर-अनुदानित उर्वरकों की बिक्री की जाती है, तो ऐसी स्थिति में विक्रेता की अनुज्ञप्ति रद्द करते हुए उनके खिलाफ उर्वरक नियंत्रण आदेश 1965 के तहत कार्रवाई की जायेगी.

10 कंपनियों के खाद एवं रासायनिक उर्वरकों का दर

जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि सरकार द्वारा इफको कंपनी का यूरिया 266.50 रुपये, डीएपी 1350 रुपये प्रति बोरी, कॉप्लेक्स के 20:20:0:13 किस्म का उर्वरक 1400 रुपये प्रति बोरी, एनएफएल कंपनी का यूरिया 266.50 रुपये प्रति बोरी, यारा कंपनी का यूरिया 266.50 रुपये प्रति बोरी, केएफएल/केआरआईबीएचसीओ कंपनी का यूरिया 266.50 रुपये प्रति बोरी, डीएपी 1350 रुपये प्रति बोरी, इंडोरामा कंपनी का यूरिया 266.50 रुपये प्रति बोरी, डीएपी 1350 रुपये प्रति बोरी, एमओपी 1700 रुपये प्रति बोरी, एसएसपी के एसएसपी-पी किस्म का उर्वरक 435 रुपये प्रति बोरी, कॉप्लेक्स के 10:26:26 किस्म का उर्वरक 1470 रुपये प्रति बोरी, 14:28:00 किस्म का उर्वरक 1550 रुपये प्रति बोरी, आईपीएल कंपनी का यूरिया 266.50 रुपये प्रति बोरी, डीएपी 1350 रुपये प्रति बोरी, एमओपी 1700 रुपये प्रति बोरी, एसएसपी के एसएसपी-पी किस्म का उर्वरक 515 रुपये प्रति बोरी, एसएसपी-जी किस्म का उर्वरक 555 रुये प्रति बोरी, पीपीएल कंपनी का डीएपी 1350 रुपये प्रति बोरी, कॉम्पलेक्स के 20:20:0:13 किस्म का उर्वरक 1470 रुपये प्रति बोरी, साई कंपनी का एसएसपी के एसएसपी-पी किस्म का उर्वरक 610 रुपये प्रति बोरी, एसएसपी-जी किस्म का उर्वरक 650 रुपये प्रति बोरी, मैटिक्स कंपनी का यूरिया 266.50 रुपये प्रति बोरी एवं केसीएफएल कपंनी का एसएसपी के एसएसपी-पी किस्म का उर्वरक 650 रुपये प्रति बोरी, एसएसपी-जी किस्म का उर्वरक 690 रुपये प्रति बोरी, एसएसपी-पी(जेडएन) किस्म का उर्वरक 675 रुपये प्रति बोरी एसएसपी-जी(जेडएन) किस्म का उर्वरक 715 रुपये प्रति बोरी दर निर्धारित किया गया है. सभी कंपनियों की बोरी 45 किग्रा के बैग में एवं शेष उर्वरकों की बोरी 50 किग्रा की बोरी होगी.

खेतों में खाद एवं रासायनिक उर्वरक का संतुलित मात्रा में प्रयोग करने की अपील

जिला कृषि पदाधिकारी ने किसानों से अपने खेतों में खाद एवं रासायनिक उर्वरक का संतुलित मात्रा में प्रयोग करने की अपील की है. उन्होंने बताया कि यदि फसलों के उत्पादन के लिए किसानों द्वारा खेतों अथवा फसलों में अधिक खाद एवं रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग करते हैं, तो न केवल मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम होती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम होने के बाद फसलों के उत्पादन में भी कमी आयेगी. लेकिन, यदि खाद एवं रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग संतुलित मात्रा में किया जाए, तो मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी बरकरार रहेगी और फसलों का उत्पादन भी अच्छा होगा.

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रिपोर्ट : जगरनाथ, गुमला.

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