स्टार्टअप का विस्तार

देश में 70 से अधिक ऐसे स्टार्टअप हैं, जिनका मूल्य एक अरब डॉलर से अधिक है. ऐसे उद्यमों की सालाना बढ़त की दर 12 से 15 फीसदी है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उचित ही यह संभावना जतायी है कि भारत में स्टार्टअप का बढ़ता दायरा भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में महत्वपूर्ण कारक बन सकता है. उन्होंने इस तथ्य को भी रेखांकित किया कि देश में 70 से अधिक ऐसे स्टार्टअप उद्यम हैं, जिनका कारोबारी मूल्य एक अरब डॉलर से अधिक हो चुका है. साल 2015 तक ऐसे उद्यमों की संख्या 10 से भी कम थी.

दुनियाभर में आधुनिक तकनीक पर आधारित उद्यमों की संख्या बढ़ रही है. भारत की आबादी में युवाओं की बड़ी संख्या है. उनके रोजगार के साथ उनकी आकांक्षाओं, उनके विचारों और नवोन्मेष के प्रति उनके रूझान को सही दिशा देने के लिए स्टार्टअप में बढ़ोतरी आवश्यक है. केंद्र सरकार ने डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया तथा वित्त उपलब्धता के कार्यक्रमों समेत कई ऐसी पहलें की हैं, जिससे तकनीक आधारित नवीन उद्यमों की ओर युवाओं का रूझान तेजी से बढ़ा है.

उल्लेखनीय है कि बड़ी संख्या में शीर्षस्थ उद्योगपति भी स्टार्टअप को पूंजी देकर उत्साहित कर रहे हैं. ऐसे उद्यमों ने जहां सेवा क्षेत्र को दायरा बढ़ाया है, वहीं रोजगार के अवसर भी पैदा किये हैं. वैश्विक स्तर पर देखें, तो भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है. इसकी सालाना बढ़त की दर 12 से 15 फीसदी है. इसका मतलब यह है कि अभी यह क्षेत्र बहुत बड़ा होगा.

स्वास्थ्य, शिक्षा, सूचना आदि के साथ विभिन्न समस्याओं के समाधान में भी इनकी भूमिका बढ़ रही है. इसका अनुमान इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि हर दिन दो-तीन तकनीक आधारित स्टार्टअप जन्म ले रहे हैं. परंपरागत रूप से उद्योग और उद्यम जगत में महिला उद्यमियों की बहुत कम भागीदारी रही है. लेकिन स्टार्टअप ने आधी आबादी के लिए भी मौका मुहैया कराया है.

आज इस क्षेत्र में महिला उद्यमियों की भागीदारी 15 फीसदी के आसपास है और बड़ी संख्या में महिलाएं इन उद्यमों में कार्यरत भी हैं. इन उद्यमों ने देशी और विदेशी पूंजी निवेश को भी आकर्षित किया है. शिक्षण-प्रशिक्षण के कार्यक्रमों द्वारा स्टार्टअप के लिए अधिक युवाओं को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है. अभी आम तौर पर ये उद्यम बड़े शहरों में पैदा हो रहे हैं तथा उन्हीं जगहों से संचालित हो रहे हैं.

अपेक्षाकृत छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्र को भी विकास की इस आधुनिक धारा के साथ जोड़ने की दिशा में प्रयास होने चाहिए. नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति में उद्यमिता पर विशेष जोर दिया गया है. आशा है कि हमारी शिक्षण संस्थाएं इस नीति के प्रावधानों को समुचित ढंग से लागू करेंगी तथा केंद्र और राज्य सरकारें इस संबंध में पर्याप्त संसाधन उपलब्ध करायेंगी.

विभिन्न सरकारी विभागों तथा लघु उद्योग विकास बैंक समेत अन्य वित्तीय संस्थानों को नवोन्मेषी विचारों के लिए आधार पूंजी देने की प्रक्रिया को सरल बनाना चाहिए ताकि अधिक युवा उद्यमी योजनाओं का लाभ उठा सकें तथा देश के विकास में अपना योगदान कर सकें. साथ ही, संकटग्रस्त उद्यमों को सहारा भी दिया जाना चाहिए.

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Published by: संपादकीय

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