सियाचीन ग्लेशियर के बर्फ में फंसे भारतीय लांस नायक के करिश्माई तरीके से जिंदा निकलने के बाद भी वे जिंदगी की जंग हार गये़ इस हादसे से पूरा देश गमगीन है़ इनसानी जीवन के प्रतिकूल परिस्थितियों वाले सियाचीन ग्लेशियर में भारत और पाक के हजारों सैनिकों की तैनाती और प्रति माह उन पर करोड़ों रुपये का खर्च बेमानी है़ इस तरह की मौतें दोनों देशों के सैनिकों की होती रहती हैं.
ताशकंद समझौते के दौरान सियाचीन इलाके की सीमा को चिह्नित नहीं करना इसका मुख्य कारण है़ आज वक्त आ गया है कि दोनों देश अपनी-अपनी सीमा तय करके उस दुर्गम इलाके से अपनी सेना हटा लें.
दोनों देश जनता की गाढ़ी कमाई को इस अनावश्यक विवाद में बर्बाद कर रहे हैं. यही रुपये देश के विकास में लगाने की जरूरत है़ आइये हम सभी अपनी-अपनी सरकारों से इस बावत अपील करें. यह न केवल हनुमनथप्पा के प्रति, बल्कि सियाचीन से सभी शहीदों के प्रति भी श्रद्धांजलि होगी.
– दयानंद कुमार, राजधनवार
