लोकतंत्र की कसौटी

भारत को आनेवाले दौर में अगर सचमुच आर्थिक महाशक्ति बनना है, तो उसे अपनी शिक्षा व्यवस्था को सुधारना होगा. क्योंकि आनेवाले वक्त में अर्थव्यवस्था ज्यादा से ज्यादा ज्ञान आधारित होनेवाली है और वही समाज तरक्की कर पायेगा, जिसके पास ज्ञान की पूंजी होगी. इस तरह, अगर वैचारिक मतभेदों के प्रति इतनी संकीर्णता और दुराग्रह बना […]

भारत को आनेवाले दौर में अगर सचमुच आर्थिक महाशक्ति बनना है, तो उसे अपनी शिक्षा व्यवस्था को सुधारना होगा. क्योंकि आनेवाले वक्त में अर्थव्यवस्था ज्यादा से ज्यादा ज्ञान आधारित होनेवाली है और वही समाज तरक्की कर पायेगा, जिसके पास ज्ञान की पूंजी होगी.
इस तरह, अगर वैचारिक मतभेदों के प्रति इतनी संकीर्णता और दुराग्रह बना रहे, तो यह भारतीय समाज के विकास के लिए तो बुरा होगा ही, ज्ञान के विस्तार के लिए भी बुरा होगा, क्योंकि ज्ञान को फलने-फूलने के लिए खुला और उदार माहौल चाहिए, न कि ऐसा माहौल, जिसमें किसी भी व्यक्ति को अपने विचार व्यक्त करने में राष्ट्र विरोधी का तमगा मिलने का डर हो.
एक तर्क यह दिया जा रहा है कि आधुनिक भारतीय बौद्धिक जगत पर वामपंथी विचारों का वर्चस्व है. हमारी अर्थव्यवस्था ने जरूर वामपंथी, समाजवादी धारा को ढाई दशक पहले निर्णायक रूप से विदा कर दिया था, लेकिन बौद्धिक जगत में अब भी बदलाव नहीं हुआ है. -आदित्य शर्मा, ई-मेल से

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