विगत 26 जनवरी, 2016 को प्रभात खबर में कृत्रिम बौद्धिकता पर एक सामग्री प्रकाशित हुई. पढ़ कर मन में यह विचार आया कि हर युग में परिवर्तनशील इस पृथ्वी पर अच्छी-बुरी सभी अवस्थाअों का बीजारोपण अतीत में ही हो जाता है. इन्हीं में रोजगार भी एक अहम मसला हर युग में रहा है. भविष्य में बढ़नेवाले रोजगार के अवसरों के संकेत बहुत पहले ही मिलने लगते हैं.
लेकिन अक्सर या तो हम उन्हें पहचान नहीं पाते या विपरीत अनुमान लगाते हैं. जब आधुनिक युग में औद्योगिक क्रांति हुई अौर मशीनी युग का आरंभ हुआ, उस समय कुछ मानवतावादी लोग ऐसी ही चिंताएं व्यक्त करते थे कि मशीनें कई लोगों के रोजगार खत्म कर देंगी. परंतु गुजरते समय में मशीनों के माध्यम से अनगिनत रोजगार के मार्ग प्रशस्त हुए एवं दुनिया विकास की अोर अग्रसर हुई. इसी प्रकार जब बाजार में कंप्यूटर आया, तब भी इससे भविष्य में रोजगार संकट की अाशंका जतायी गयी. लेकिन हुआ इसके ठीक विपरीत. कंप्यूटर ने रोजगार अौर विकास को दिशा दी.
जब-जब किसी आविष्कार को रोजगार को कम करनेवाला समझा गया, तब अधिकांश अवसरों पर हमने उसे रोजगार का हितैषी ही पाया है. रोबोट एवं कृत्रिम बौद्धिकता के संबंध में आज हम यही अनुमान लगा रहे हैं.
लेकिन यह उस भविष्य का बीजारोपण हो सकता है, जब रोजगार एवं विकास की इतनी संभावनाएं बढ़ जायेंगी कि इसका उपयोग अतिआवश्यक हो जायेगा. प्रथम दृष्टया आज हम भविष्य के संदर्भ में इसका अनुमान लगा सकने में असमर्थ हो सकते हैं, जैसा पहले मशीनरी एवं कंप्यूटर के संबंध में हुआ, लेकिन उन्हीं के समान यह भविष्य में प्रंचड विकास एवं रोजगार का सूचक हो सकता है.
-एएम सज्जाद, कडरू, रांची
