सबकी चाह होती है कि अपने हुनर, लगन व समाज के लिए कार्यों के दम पर समाज में अपनी पहचान बनाएं. लेकिन, कुछ लोग अपनी काबिलियत पर भरोसा करने के बजाय ऐसे कदम उठा लेते हैं, जो हास्यापद होते हैं. इसका सबसे नया उदाहरण बिहार में हुई एक घटना है.
सीतामढ़ी में एक अधिवक्ता ने भगवान राम पर मुकदमा कर दिया. भगवान राम को महिला पर अत्याचार करनेवाले के रूप में पेश किया गया, बल्कि उन्हें महिला विरोधी बताने में भी कोई कोर-कसर नही छोड़ी. सवाल है कि किसी की आस्था पर ऐसी टिप्पणियां क्यों की जा रही है.
इससे धार्मिक भावना को भी ठेस पहुंचने के साथ कोर्ट का समय भी बरबाद होता है. सवाल है कि क्यों देवी-देवताओं के नाम को ही पब्लिसिटी के लिए इस्तेमाल किया जाता है? हालांकि, कोर्ट ने केस की सुनवाई से मना कर दिया. सरकार को चाहिए कि किसी की धार्मिक भावना आहत न हो, इसके लिए सख्त कानून बनाये.
-सोनल कुमार महतो, ई-मेल से
