भारत में सभी नागरिक को समान अधिकार मिला हैं. लेकिन, राजनीितक स्वार्थ के लिए समाज बंटता नजर आता है. सोचने की जरूरत है कि जब छात्र-छात्राओं को स्कूलों में समान शिक्षा दी जाती है, तो फिर नौकरी में वर्ग विशेष को छूट क्यों? फाॅर्म खरीदने तक भी यही हाल है.
सवाल है कि क्या आरक्षित वर्ग ही देश में गरीब हैं और सारे अमीर? अगर गरीबों को आगे लाना है, तो बीपीएल कार्डधारियों को आरक्षण देना चाहिए. आरक्षण लागू किये हुए ढाई दशक हो चुके हैं. फिर भी राजनीतिक कारणों से इसकी समीक्षा नहीं की जा रही है.
सबसे महत्वपूर्ण सवाल है कि क्या अब तक आरक्षित वर्ग सक्षम नहीं हो पाया है? और कितने वर्ष लगेंगे उन्हें सक्षम होने में? अगर यह वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल होता रहेगा, तो निश्चित रूप से विनाशकारी साबित होगा.
-मनसा राम महतो, सरायकेला
