ब्राजील के साथ लैटिन अमेरिका के 23 देशों में जिका वायरस के प्रसार को लेकर जिस तरह के गंभीर खतरों की आशंका जतायी जा रही है, उसके खौफ के मद्देनजर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इसे ‘लोक स्वास्थ्य इमरजेंसी’ घोषित करना एक सही व जरूरी कदम है. इन देशों में पिछले चार महीनों में चार हजार से अधिक संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं.
कई प्रभावित देशों में पर्यटकों की बड़े पैमाने पर आवाजाही से इस वायरस के पूरी दुनिया में फैलने का खतरा है. भारत में भले ही अब तक इसका कोई मामला सामने न आया हो, लेकिन हम यह मान कर नहीं चल सकते कि हमारा देश इससे सुरक्षित है. हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से इसकी निगरानी और एहतियात के लिए विशेषज्ञों की कमेटी गठित कर दी गयी है, लेकिन यह प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि संक्रमण रोकने और उपचार की तैयारियां हवा-हवाई न हों. जिका का फैलाव मच्छरों के द्वारा होता है.
देश में मच्छर जनित अन्य प्रमुख रोगों से बचाव और उपचार की तैयारियों के हर साल बड़े-बड़े दावे किये जाते हैं, लेकिन डेंगू आदि के प्रसार के वक्त राजधानी दिल्ली तक में स्वास्थ्य सेवाएं लाचार नजर आने लगती हैं. ऐसे में, लोग अपने स्तर पर भी जिका वायरस और अन्य मच्छर जनित बीमारियों से जुड़ी सही जानकारियां हासिल कर जितने अधिक जागरूक रहेंगे, बचाव उतना ही आसान होगा. जानकार बताते हैं कि जिका वायरस से संक्रमित व्यक्तियों में आम तौर पर जोड़ों में तेज दर्द, आंखें लाल होना, मतली, चिड़चिड़ापन या बेचैनी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं.
हालांकि इससे संक्रमित पांच में से एक व्यक्ति में ही इसके लक्षण स्पष्ट दिखते हैं. अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन की चेतावनी के मुताबिक, गर्भवती महिलाओं में जिका वायरस के संक्रमण के कारण नवजात में ‘माइक्रोसिफेली’ हो जाता है, जिसमें उनका सिर छोटा और दिमाग दोषपूर्ण रह जाता है.
चूंकि इसके उपचार के लिए कोई अचूक दवा अब तक नहीं बनी है, इसलिए आपको मच्छरों से बचने के उपाय करना ही चाहिए. हालांकि मच्छरों से बचने के उपाय तब तक कारगर नहीं हो सकते, जब तक कि सरकार भी मच्छरों की बढ़वार रोकने के प्रयास ईमानदारी से न करे.
फिलहाल, अच्छी खबर यह है कि हैदराबाद की एक दवा कंपनी ने जिका वायरस का टीका विकसित करने का दावा किया है. हालांकि इसके परीक्षण और उपयोगिता की पुष्टि में अभी वक्त लगेगा. दुआ करें कि अपना देश इससे बचा रहे और यदि इसका संक्रमण यहां पहुंचे भी तो हमारी स्वास्थ्य सेवाएं असहाय नजर न आये.
