स्मार्ट का सपना

स्मार्ट यानी चुस्त-दुरुस्त, फुर्तीला और बिजली की तरह तेज होना आज बहुत जरूरी हो गया है़ मोदी सरकार का कुछ शहरों को स्मार्ट बनाने का एक अच्छा कदम है, मगर इसमें कुछ कमियों के साथ पक्षपात नजर आ रहा है जो शोभनीय नहीं है़ अभी यह योजना कई तरह से अधूरी है, जिस पर फिर […]

स्मार्ट यानी चुस्त-दुरुस्त, फुर्तीला और बिजली की तरह तेज होना आज बहुत जरूरी हो गया है़ मोदी सरकार का कुछ शहरों को स्मार्ट बनाने का एक अच्छा कदम है, मगर इसमें कुछ कमियों के साथ पक्षपात नजर आ रहा है जो शोभनीय नहीं है़
अभी यह योजना कई तरह से अधूरी है, जिस पर फिर से पारदर्शी तरीके से विस्तृत विचारमंथन और जनमत के साथ इसे पूरा करना जरूरी है, ताकि इसमें कोई कमी न रहे़ सबसे बड़ी कमी नियोजन की है, जिसके बिना यह धन की बर्बादी ही होगी़
बापू के अनुसार गांव को भी यदि संपूर्ण ईकाई बना दिया जाये तो इन शहरों की ओर पलायन ही न होगा और न इतनी समस्याएं ही होंगी़ कभी तत्कालीन नेता जगमोहन और स्वर्गीय संजय गांधी ने भी यह सपना देखा था, जो दुर्भाग्य से पूरा नहीं हो पाया. आशा है मोदी सरकार इसे पूरा करेगी.
-वेद मामूरपुर, ई-मेल से

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >