भारत की ठंडी लावारिस लाशें

भारत जहां आज महाशक्ति बनने के दौड़ में खड़ा है, वहीं दूसरी ओर एक कड़वी सच्चाई यह भी है कि देश की राजधानी दिल्ली में आये दिन ठंड से कई लोगों की मृत्यु का आंकड़ा प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है़ पर इन लाशों के अंतिम संस्कार में चार लोग भी शामिल नहीं होते हैं, तो […]

भारत जहां आज महाशक्ति बनने के दौड़ में खड़ा है, वहीं दूसरी ओर एक कड़वी सच्चाई यह भी है कि देश की राजधानी दिल्ली में आये दिन ठंड से कई लोगों की मृत्यु का आंकड़ा प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है़ पर इन लाशों के अंतिम संस्कार में चार लोग भी शामिल नहीं होते हैं, तो वहीं दादरी में अखलाक और हैदराबाद में रोहित वेमुला की मृत्यु पर जम कर राजनीति हाेती है. बड़े नेता अपने वोट बैंक की राजनीतिक परंपरा को इसके आगे बढ़ायें
गरीबों की दुर्दशा प्रतिदिन दयनीय होती जा रही है. हमारे देश की यह विडंबना है और गुमनाम, लावारिस लाशें सच्चाई है. कोई भी राजनेता इन लावारिस लाशों की अंतिम संस्कार में अपनी सहभागिता भी दर्ज नहीं कराते़ ऐसे ढकोसले जनप्रतिनिधियों को समाज की ऐसी समस्याओं के प्रति सचेत और जागरूक कराने की जरूरत है, जिससे वे समाज के प्रति संवेदनशील बने रहें़
-कन्हाई कु साव, भद्रेश्वर, हुगली

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