झारखंड में चल रही शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया में वैधानिक तौर-तरीकों का अनुपालन करने वाले अभ्यर्थी आखिरकार ठगे ही गये. जिस बात की आशंका थी, वह सामने आ ही गया.
अधिक मेधा अंक वाले हाथ मलते रह गये और कम अंक वालों ने गलत सूचनाओं के आधार पर नियुक्तियां अपने नाम करा ली. इसके लिए विभाग पूरी तरह जिम्मेवार है क्योंकि अभ्यर्थियों को सही सूचनाएं न देकर, भ्रम में डाले रखा गया. उहापोह की स्थिति का जिलों में भरपूर फायदा उठाया गया और अनियमित तरीके अपनाने वालों की नियुक्ति कर दी गयी.
गैर पारा श्रेणी में जाने की योग्यता रखने वाले पारा शिक्षकों को प्रतिबंधित करके विभाग ने अनैतिक तरीके को बढ़ावा दिया. ये त्रुटियों सुधारे बगैर अगर प्रक्रिया पूरी की गयी और अभ्यर्थियों के शेष रहते सीटें खाली रहीं तो व्यवस्था से विश्वास उठ जायेगा.
-अभिषेक कुमार, ई-मेल से
