संविधान बनने के इतने साल बाद भी हमारे देश में आरक्षण रूपी विषमताओं का जारी रहना अपने आप में एक विफलता है. निश्चित रूप से आरक्षण की समीक्षा की जानी चाहिए.
आरक्षण को समाप्त किये बिना भारत कभी विकसित राष्ट्र नहीं बन सकता. होना तो यह चाहिए कि सरकार सभी गरीब जनता को भोजन, वस्त्र, आवास, शिक्षा, स्वास्थ, सुरक्षा एवं रोजगार की गारंटी दे, न कि आरक्षण की सुविधा उपलब्ध कराये. आरक्षण से योग्य व्यक्तियों में विकृतियां आती हैं और अयोग्य व्यक्ति पदासीन होने के बावजूद हीन भावना की चपेट में रहता है.
इससे जातिवाद और धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा मिलता है. सरकार इतना तो कर ही सकती है कि पुरुषों को आरक्षण से मुक्त्त कर दे. बिना किसी जाति-धर्म के भेद-भाव रहित होकर सिर्फ महिलाओं को आरक्षण दे.
-मिलन कुमार, जोरी, चतरा
