जब से नयी सरकार सत्ता में आयी है, तब से हर दिन कोई न कोई देशभक्ति का नया पैमाना तय करता है. मगर कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिन्हें खुद देशभक्ति की वास्तविकता की जानकारी नहीं है, वे सामाजिक तौर पर खुद को देशभक्त बता कर दूसरे को उपदेश देना शुरू कर देते हैं.
खास कर इंटरनेट की दुनिया में आजकल देशभक्ति के नाम पर दूसरे को जलील और वाद-विवाद करने की प्रक्रिया जोरों पर है. सोशल मीडिया पर यदि कोई मित्र मन के मुताबिक बात नहीं कहता है, तो उसे देशद्रोही का तमगा देने में कोताही नहीं बरती जाती.
सबसे बड़ी बात यह है कि धार्मिक, सांस्कृतिक, राजनैतिक और प्राकृतिक विविधता वाले भारत में यदि इस तरह देशभक्ति का प्रमाण पत्र दिया जायेगा, तो हर शहर और गांव के हर मुहल्ले में देशभक्तों से अधिक देशद्रोहियों की कतार लग जायेगी. इसके लिए हमें अपनी सोच बदलने की जरूरत है.
-सुमंत चौधरी, जमशेदपुर
