हम कब महसूस करेंगे ‘अच्छे दिन’

लोगों को बड़ी उम्मीदें थी कि नयी सरकार में रोजगार के पर्याप्त अवसर प्राप्त होंगे. लेकिन, आज भी करीब एक करोड़ लोगों को ही रोजगार मिल पाया है. अत: सबसे अधिक आवश्यकता इस बात की है कि मेन्यूफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत बनाया जाये. अधिक से अधिक कल-कारखाने खोले जायें, जिससे मजदूरों को उनमें रोजगार मिल […]

लोगों को बड़ी उम्मीदें थी कि नयी सरकार में रोजगार के पर्याप्त अवसर प्राप्त होंगे. लेकिन, आज भी करीब एक करोड़ लोगों को ही रोजगार मिल पाया है. अत: सबसे अधिक आवश्यकता इस बात की है कि मेन्यूफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत बनाया जाये. अधिक से अधिक कल-कारखाने खोले जायें, जिससे मजदूरों को उनमें रोजगार मिल सके. इंफ्रास्टक्चर जैसे रेल, सड़क, पुल, बंदरगाह और बिजलीघरों का तेजी से विकास हो.
उसमें भी बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा. सरकार को चाहिए कि निजी उद्योग के क्षेत्र से ऐसे ‘एक्जीक्यूटिव्स’ को थोड़े दिनोंं के लिए सरकारी उपक्रमों में उसी तनख्वाह पर नौकरी दिलायें, जो सरकारी उपक्रमों को यह गुर सिखायेंगे कि उन्हें सफलतापूर्वक कैसे चलाया जाता है. इसमें कोई संदेह नहीं कि मध्यम और निम्न वर्ग की जनता महंगाई से त्रस्त हो गयी है.
वेतनभोगी मध्यम वर्ग के लोग यह देख कर हैरान हैं कि सब्जियों के मूल्य दिनोंदिन आसमान छू रहे हैं. लाख चाहने के बाद भी न तो केंद्र सरकार और न ही राज्य सरकार उस पर नियंत्रण पा रही है. मामला अत्यंत ही गंभीर है. इस पर अविलंब ध्यान देने की आवश्यकता है.
केंद्र और राज्य सरकारों ने जगह-जगह इन जमाखोरों पर छापे मारे हैं, परंतु यह पूरा नहीं है. ये जमाखोर और कालाबाजारी अपने काम में ज्यादा ही चुस्त-दुरुस्त होते हैं. ये अनाज ऐसे गुप्त स्थानों पर छिपा कर रखते हैं, जिनका पता आसानी से लगाना काफी मुश्किल होता है. यही नहीं, इन कालाबाजारियों और जमाखोर अपने सूत्रों के जरिये छापेमारी होने के पूर्व ही सचेत हो जाते हैं, जिससे वे सुरक्षित बच निकलते हैं.
सरकार ने ऐलान किया है कि शीघ्र ऐसा कानून बनानेवाली है, जिससे पकड़े गये जमाखोर की गिरफ्तारी गैर जमानती होगी. पूरे देश की जनता प्रतीक्षा कर रही है कि वह कानून कब आयेगा. साथ ही अपने बीच के गलत अधिकारी व कर्मचारी को भी पहचानना होगा.
– सतीश कुमार सिंह, रांची

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