संयमित हो सरस्वती पूजा की तैयारी

वसंत के पांचवें दिन मां सरस्वती की पूजा की जाती है. शिक्षा व्यवस्था से जुड़े लोगों व पढ़ाई कर रहे छात्रों के साथ-साथ हर शिक्षित व्यक्ति की मां शारदे के प्रति आस्था रहती है. स्कूल-कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों में भी पूजा का खासा महत्व रहता है. पूजा को लेकर चंदा वसूली व डीजे के आयोजन […]

वसंत के पांचवें दिन मां सरस्वती की पूजा की जाती है. शिक्षा व्यवस्था से जुड़े लोगों व पढ़ाई कर रहे छात्रों के साथ-साथ हर शिक्षित व्यक्ति की मां शारदे के प्रति आस्था रहती है.
स्कूल-कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों में भी पूजा का खासा महत्व रहता है. पूजा को लेकर चंदा वसूली व डीजे के आयोजन की तैयारियां भी शुरू हो गयी हैं. लेकिन, भक्तिमय माहौल की स्थापना की बजाय, प्रशासन द्वारा निर्धारित मानकों से इतर फूहड़ गीतों को बजाने का कोई औचित्य नजर नहीं आता. अगर यही भक्ति है, तो यह विद्यार्थी जीवन व समाज के लिए अभिशाप है.
आप युवा छात्र हैं. देश के भविष्य हैं. शिक्षा या विद्या प्राप्ति का उद्देश्य, छात्रों में नैतिकता, विनम्रता और सभ्यता का विकास करना है. जब तक व्यवहार में शालीनता नहीं आयेगी, तब तक सफलता नहीं मिल पायेगी. इस लिए पूजा को पूजा रहने दें, दिखावा नहीं बनायें.- सुधीर कुमार, गोड्डा

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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