मुद्दों की ही हो राजनीति

वर्तमान में हमारे देश में जिस तरह की राजनीति चल रही है, यह देश एवं समाज के भविष्य के लिए कतई शुभ संकेत नहीं है. आज कई राजनीतिक दल एवं नेता आये दिन यह साबित करने में लगे रहते हैं कि उनकी कमीज दूसरे की कमीज से ज्यादा सफेद. कोई मुद्दा मिला नहीं कि उसे […]

वर्तमान में हमारे देश में जिस तरह की राजनीति चल रही है, यह देश एवं समाज के भविष्य के लिए कतई शुभ संकेत नहीं है. आज कई राजनीतिक दल एवं नेता आये दिन यह साबित करने में लगे रहते हैं कि उनकी कमीज दूसरे की कमीज से ज्यादा सफेद. कोई मुद्दा मिला नहीं कि उसे लपकने को तैयार रहते हैं ऐसे लोग.
ये न खुद जनता के लिए काम करते हैं, अौर न ही काम करनेवालों को जनता के लिए काम करने देते हैं. इसमें नुकसानआम जनता को उठाना पड़ता है, पर किसी को आम जनता की फिक्र नहीं. ऐसे लोग मुद्दों से भटकते और राजनीति चमकाते हैं.
काश ऐसा हो कि राजनीति में शिक्षा, रोजगार, भ्रष्टाचार, कानून व्यवस्था, तरक्की जैसे मुद्दे उठें अौर धर्म, मजहब, जाति, मंदिर, मसजिद, पशु आदि पर राजनीति न हो. व्यवस्था बदले अौर दोषी, अपराधी, बलात्कारियों को बचाने की राजनीति न हो. ऐसी राजनीति तो कतई न हो, जिसमें एक-दूसरे को नीचा दिखाने की कवायद छिड़े और देश के मान सम्मान को ठेस पहुंचे.
– सुमंत चौधरी, जमशेदपुर

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