लोकतंत्र विश्व की सबसे लोकप्रिय शासन प्रणाली है, लेकिन मतदाताओं में आवश्यक शिक्षा, समझ और जागरूकता के अभाव में हर बार कुछ आपराधिक, अनुभवहीन और कम शिक्षित लोग देश का प्रतिनिधित्व करते नजर आते हैं. ऐसे अयोग्य जनप्रतिनिधियों के कारण मतदाताओं को उपेक्षा का शिकार होना पड़ता है, जबकि लोकतंत्र की असली ताकत तो नागरिकों में निहित है.
इससे प्रतीत होता है कि देश की सवा सौ करोड़ जनता का एकमात्र काम चुनावों में जाकर अपने मताधिकार का प्रयोग मात्ररह गया है. दूसरी अोर जनता के मुद्दों, समस्याओं और उसके समाधान से किसी भी सरकार या राजनेता का सरोकार नहीं. ध्यान रहे, लोकतंत्र में मतदाता प्रथम होता है, पर उसे भी जागरूक होना होगा. लोकतंत्र की सार्थकता के लिए यह जरूरी है.
– सुधीर कुमार, ई-मेल से
