हमारी पिछड़ी मानसिकता

भू-माता रण रागिनी ब्रिगेड की करीब चार सौ महिलाओं के जत्थे को महाराष्ट्र पुलिस ने शनि शिंगणापुर मंदिर में जाने से रोक दिया. क्यों रोका गया? इसके पीछे उनका तर्क था कि मंदिर परिसर में यथास्थिति बनाए रखना जरूरी है. चूंकि, मंदिर में पिछले 400 वर्षों से महिलाओं को चबूतरे पर चढ़ कर तेल अर्पण […]

भू-माता रण रागिनी ब्रिगेड की करीब चार सौ महिलाओं के जत्थे को महाराष्ट्र पुलिस ने शनि शिंगणापुर मंदिर में जाने से रोक दिया. क्यों रोका गया? इसके पीछे उनका तर्क था कि मंदिर परिसर में यथास्थिति बनाए रखना जरूरी है. चूंकि, मंदिर में पिछले 400 वर्षों से महिलाओं को चबूतरे पर चढ़ कर तेल अर्पण करना मना है, इसलिए इन्हें रोका गया है.

21वीं शताब्दी में भी हमारी सोच इतनी दकियानुसी है. एक ओर तो हम कहते फिरते हैं कि बेटे-बेटी में फर्क नहीं होना चाहिए. ‘बेटी हो या बेटे, बच्चे दो ही अच्छे’ तथा ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के नारे लगाते हैं. लेकिन, महिलाओं के पहनावे से लेकर कई तरह के रोक लगाने के पीछे हमारी पिछड़ी मानसिकता ही है. महिलाओं के प्रति हमारी नीति शुरू से ही गलत रही है. हम कहते कुछ हैं, और करते कुछ हैं.

– चंद्रशेखर कुमार, रांची

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