भारतीय सामाज व संस्कृति आज जिस स्थिति में है, उनके संदर्भ में भारत का अतीत और भविष्य महत्वहीन लगता है. यहां के लोगों के लिए प्रार्थना और भक्ति फैशन की सामग्री बन गयी है. पहले प्रार्थना शांत मन और दिल से की जाती थी. लेकिन, आज की प्रार्थना बड़े-बड़े साउंड बॉक्स और शोर-शराबा करके की जाती है. इससे दूसरे कई लोगों को परेशानी होती है, लोग यह भूल जाते हैं.
प्रार्थना और पूजा शांति के लिए की जाती है. लेकिन, आज शोर शराबे के साथ पूजा-पंडालों या अन्य मौकों पर लोग फिल्मी गानों पर नृत्य करते हुए खुद को दुनिया के सामने पेश करते हैं. लोग देख कर आश्चर्य करते हैं कि अपने आराध्य के समक्ष ऐसे गाने बजाये जा रहे हैं. आखिर ये किसकी भक्ति कर रहे हैं. अपने आराध्य की या फिल्मी गानों की. लोगों को भक्ति सच्ची श्रद्धा से करनी चाहिए.
– महीप प्रसाद हेंब्रम, ई-मेल से
