आये दिन सरकारी नौकरी के लिए नियुक्तियां निकाली जाती है. चाहे राज्य सरकार की हो या केंद्र सरकार की. एक पद के लिए कई उमीदवार होते है. ऐसे में लाखों अभ्यार्थी प्रतियोगिता परीक्षा में आवेदन करते है. जिसमें परीक्षा शुल्क के रूप में मोटी शुल्क वसूली जाती है. इनमें ऐसे अभ्यार्थी भी होते हैं, जो नौकरी के लिए योग्य तो होते हैं, पर आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण चाह कर भी आवेदन नहीं कर पाते.एेसे अभ्यर्थी नौकरी से वंचित हो जाते हैं.
इसमें उन अभ्यर्थियों का सपना टूट जाता है तथा सरकार भी योग्य अभ्यर्थी खो देती है. इस मसले पर सरकार को ध्यान देना चाहिए कि उसे परीक्षा शुल्क के नाम पर अपना खजाना भरने के बजाय योग्य उमीदवार का चयन करना है, ताकि अभ्यर्थी के साथ इंसाफ हो.
-सुमंत चौधरी, जमशेदपुर
