देश में आम नागरिकों के लिए विभिन्न क्षेत्रों में नौकरी के आवेदन के लिए जिस तरह शैक्षिक योग्यता, अधिकतम व निम्नतम उम्र सीमा आदि मापदंड निर्धारित हैं, उसी तरह जनप्रतिनिधियों के लिए भी मापदंड तय किये जाने चाहिए.
अफसोस की बात है कि जिन राजनेताओं को हम चुन कर प्रतिनिधित्व करने के लिए भेजते हैं, उन पर आमनागरिकों के साथ-साथ देश सेवा की भी जिम्मेदारी होती है, उनके लिए कोई भी योग्यता या मापदंड नहीं तय किया जा सका है. पंचायतों से लेकर संसद तक चुने गये जनप्रतिनिधियों पर आम नागरिकों के लिए योजना बनाने व क्रियान्वयन की जवाबदेही होती है.
वे देशहित में कानून भी बनाते हैं. लेकिन खुद के नियम-कानून पर वो गंभीर नहीं होते. या फिर इसीलिए भी नहीं बनाते कि मापदंड तय होने से देश में राजनीतिक बेरोजगारी बढ़ जायेगी. पर होना यह चाहिए कि देश में जनप्रतिनिधियों के लिए भी योग्यता तय हो, ताकि आम नागरिक को भी लगे की कानून सबके लिए बराबर है.
– सुमंत चौधरी, जमशेदपुर
