आम बजट की तैयारियों में केंद्र सरकार के लिए आर्थिक मोरचे पर अर्थव्यवस्था की दोहरी मार हुई है. आम आदमी के लिए रोजमर्रा के जरूरी सामान के दाम बढ़ने से खुदरा महंगाई दर में लगातार पांचवें महीने बढ़ोतरी देखी गयी है. खुदरा महंगाई दर बढ़ने से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों पर भी आम आदमी के सपने को झटका लगा है. वहीं, देश में औद्योगिक उत्पादन की दर भी चार साल के न्यूनतम स्तर पर है. इससे अर्थव्यवस्था के उबरने की उम्मीदों को झटका लगा है.
ऐसे में सरकार पर अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए आम बजट 2016-17 में उपाय करने का दबाव होगा. लगातार पांचवें महीने खुदरा मुद्रास्फीति बढ़ने से आरबीआइ के लिए ब्याज दरों में कटौती मुश्किल हो जायेगी. 31 मार्च को समाप्त हो रहे वित्त वर्ष के लिए सरकार ने पहले ही आर्थिक विकास दर के अनुमान को संशोधित कर 7-7.5% रहने की संभावना जतायी है. पहले 8.1-8.5% आर्थिक विकास दर हासिल करने का अनुमान था.
– सतीश कुमार िसंह, रांची
