क्या कारगर होते हैं कड़े कानून?

दिल्ली में निर्भया के साथ हुए हादसे से पूरा देश हिल गया था. महिला संगठनों व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दोषियों के खिलाफ कड़े कानून बनाने के लिए जोरदार प्रदर्शन किया. किसी ने दुष्कर्मी को फांसी की सजा, तो किसी ने नपुंसक बनाने की मांग की वकालत की थी, पर घटनाअों में कमी नहीं आयी. नाबालिग […]

दिल्ली में निर्भया के साथ हुए हादसे से पूरा देश हिल गया था. महिला संगठनों व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दोषियों के खिलाफ कड़े कानून बनाने के लिए जोरदार प्रदर्शन किया. किसी ने दुष्कर्मी को फांसी की सजा, तो किसी ने नपुंसक बनाने की मांग की वकालत की थी, पर घटनाअों में कमी नहीं आयी. नाबालिग भी ऐसी घटनाअों में शामिल हो रहे अौर बच जा रहे हैं. ऐसे में ‘किशोर’ शब्द को पुनः परिभाषित करने की मांग जोर पकड़ रही है.
ऐसे में सवाल यह है कि क्या सिर्फ कड़ी सजा से दुष्कर्म की घटनाएं बंद हो जायेंगी? शायद नहीं. आज जरूरत है स्कूली शिक्षा के साथ नैतिक शिक्षा के समावेश की. अश्लीलता फैलानेवाले फिल्मों पर रोक लगाने की. सजा के बजाय उनका मानसिक इलाज कराने की. इस तरह की घटनाएं न हों, इसके लिए कारणों को दूर करने की जरूरत है.
– मनोज, ई-मेल से

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