धौनी की परीक्षा

पर्थ की सपाट पिच पर सिर्फ तीन विकेट गंवा कर बड़ा स्कोर (309 रन) करने के बाद भी मेहमान टीम का आत्मसमर्पण कर देना जहां भारतीय क्रिकेट प्रेमियों को मायूस कर गया है, वहीं कुछ सवाल भी छोड़ गया है. ऑस्ट्रेलिया के ओपनरों को सिर्फ 21 रन पर चलता करने के बाद भी यदि टीम […]

पर्थ की सपाट पिच पर सिर्फ तीन विकेट गंवा कर बड़ा स्कोर (309 रन) करने के बाद भी मेहमान टीम का आत्मसमर्पण कर देना जहां भारतीय क्रिकेट प्रेमियों को मायूस कर गया है, वहीं कुछ सवाल भी छोड़ गया है. ऑस्ट्रेलिया के ओपनरों को सिर्फ 21 रन पर चलता करने के बाद भी यदि टीम मैच को अपने पक्ष में करने में विफल रही, तो जाहिर तौर पर पहला सवाल कप्तान महेंद्र सिंह धौनी से ही जुड़ा होगा, जिन्हें क्रिकेट के दीवाने ‘जीत का जादूगर’ मानते रहे हैं.

धौनी निर्विवाद रूप से भारतीय क्रिकेट के सफलतम कप्तान हैं, जिनकी अगुवाई में टीम न केवल टेस्ट रैंकिंग में पहले पायदान तक पहुंची, बल्कि एकदिनी और टी-20 विश्वकप भी जीत चुकी है. सफल विकेटकीपर-बल्लेबाज के साथ-साथ कप्तान के रूप में धौनी की आक्रामक शैली और चुस्ती-फुर्ती की कुछ साल पहले तक दुनिया कायल थी. लेकिन, मुश्किल वक्त में विरोधी खेमे को चौंका देनेवाले जिन नये प्रयोगों के लिए कप्तान धौनी जाने-सराहे जाते रहे हैं, उनकी कमी पिछले विश्वकप के बाद से खल रही है.

हार के बाद दिये धौनी के बयानों पर गौर करें, तो उन्होंने इसका ठीकरा जहां स्पिनरों की नाकामी पर फोड़ा है, वहीं अंपायर निर्णय समीक्षा प्रणाली (यूडीआरएस) पर भी सवाल उठाये हैं. आॅस्ट्रेलिया की सपाट पिचों पर भारतीय स्पिनरों का जादू अमूमन नहीं ही चलता है. ऐसे में धौनी यदि स्पिनरों से ही मैच जिताने की उम्मीद कर रहे थे, तो यह चमत्कार का इंतजार करने जैसा ही कहा जायेगा. इसी तरह हार के बाद यूडीआरएस पर सवाल उठाना अपनी जिम्मेवारी से पीछा छुड़ाना ही माना जायेगा.

हकीकत यही है कि रोहित (नाबाद 171) और विराट (91) की दूसरे विकेट के लिए 207 रनों की रिकाॅर्ड साझेदारी भी टीम की हार नहीं टाल सकी. आॅस्ट्रेलिया की ओर से स्मिथ की कैरियर की सर्वश्रेष्ठ पारी (149) और बेली (112) के साथ तीसरे विकेट के लिए रिकॉर्ड 242 रनों की साझेदारी के दौरान भारतीय टीम जिस तरह बेबस नजर आयी, वह क्षेत्ररक्षण के दौरान टीम की रणनीति पर धौनी की ढीली पड़ती पकड़ का ही संकेत दे रही थी.

भारत की ओर से डेब्यू कर रहे बायें हाथ के तेज गेंदबाज बरिंदर सरन यदि इस मैच में सबसे सफल गेंदबाज रहे, तो यह उम्मीद जगानेवाली खबर है. लेकिन, यह सवाल भी उठेगा ही कि क्या अब धौनी के पास अपने अनुभवी गेंदबाजों की क्षमता और प्रतिभा का एकदिनी मैचों में सही वक्त पर सही इस्तेमाल करने की कोई नयी रणनीति या सोच शेष नहीं है? यह ऐसा सवाल है, जिस पर आनेवाले मैचों में धौनी हर घड़ी परखे जाएंगे.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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