झारखंड में स्थानीयता व नियोजन नीति का होना अत्यंत आवश्यक है. राज्य की सरकारी नौकरियों में स्थानीयता व नियोजन नीति के बिना ही नियुक्तियां भी हो रही हैं, जो न्यायोचित प्रतीत नहीं होता है. क्योंकि, जिस उद्देश्य से आदिवासियों व मूलवासियों ने राज्य निर्माण के लिए संघर्ष किया और राज्य निर्माण के बाद उत्साहित थे कि अब उनके अच्छे दिन आयेंगे. लेिकन, राज्य निर्माण के 15 वर्षों बाद भी स्थिति पूर्ववत रहने से खुद को ठगा-सा महसूस कर रहे हैं.
अतः राज्य में सामाजिक समानता व न्याय के साथ शांतिपूर्ण परिवेश में चहुंमुखी विकास के लिए सभी वर्गों के लोगों से राय-मशविरा कर आदिवासियों व मूलवासियों के हितों की रक्षा के लिए सर्वमान्य स्थानीय व नियोजन नीति की पहल की जानी चाहिए.
– वशिष्ठ कुमार हेंब्रम, पश्चिम सिंहभूम
