शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया में 8 से 10 काउंसलिंग के बावजूद अब तक 50 फीसदी पद भी नहीं भरा जा सका है. जो नियुक्तियां हुई हैं, उनमें कई लोग फर्जी हैं. यह नियुक्ति प्रक्रिया सामान्य कोटि, पारा शिक्षक व स्थानीय लोगों पर कुठाराघात है.
मीडियाकर्मी भी नियमावली या विज्ञप्ति का अध्ययन करें, तो वस्तुस्थिति स्पष्ट करने में आसानी होगी. फर्जी प्रमाणपत्र बनानेवाले गिरोह का उद्भेदन होने के उपरांत अब तक कोई कार्रवाई नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है. इन तत्वों के विरुद्ध लड़नेवालों की बात दबा दी जाती है या फिर खानापूर्ति कर दी जाती है.
अब तक किसी मीडिया ने विभाग या सरकार से यह नहीं पूछा कि हजारों योग्य अभ्यर्थी लाइन में है, फिर भी रिक्त पद क्यों नहीं भरा जा सका. जब एक ही नियमावली है, तो सभी जिलों में अलग-अलग नियम क्यों लागू किया जाता है. इस संदर्भ में मीडिया को भी अहम भूमिका निभानी होगी, क्योंकि इसके बगैर राज्य में उपेक्षितों को न्याय मिलना असंभव दिखता है.
– विजय कुमार पांडेय, कोडरमा
