अगर तुम न होते

विकास की चर्चा सरेआम हो¨ रही है. विकास जीवन की निरंतरता से जुड़ी अंतहीन क्रिया है. फिर भी राजनीतिक दल¨ों की हर गतिविधियां विकास के इर्द-गिर्द ही घूमती हैं. वैसे समाज व राष्ट्र का विकास सामूहिक प्रयासों से किया जाना चाहिए. भारत जैसे देश में जहां की आबादी सवा सौ करोड़ से ज्यादा है, उसे […]

विकास की चर्चा सरेआम हो¨ रही है. विकास जीवन की निरंतरता से जुड़ी अंतहीन क्रिया है. फिर भी राजनीतिक दल¨ों की हर गतिविधियां विकास के इर्द-गिर्द ही घूमती हैं. वैसे समाज व राष्ट्र का विकास सामूहिक प्रयासों से किया जाना चाहिए.
भारत जैसे देश में जहां की आबादी सवा सौ करोड़ से ज्यादा है, उसे विकास कार्य के आंकड़ों में समेटना आसान नहीं. देश के मीडिया की बदौलत विकास की चर्चाएं आमजन तक पहुंच पाती हैं, अन्यथा मिट्टी-गारे में सने मजदूर को क्या पता कि उसके सिर पर लदे ईंट-पत्थर और लकड़ी-लो¨हे विकास की ऊंचाइयां गढ़ने में लगे हैं.
यह जानने की अभिलाषा सब की हो¨ती है कि दिखाये गये सपने हकीकत के कितने करीब हैं. देश के चौथे स्तंभ¨ ने उमीद¨ की दीवार को¨ ढहने से बचा कर रखा है. इनकी पैनी नजरों ने ही विकास कार्य¨ में हुई सरकारी अनदेिखयां और उसके जिम्मेवार¨ के ‘हकलाते’ जवाबों को¨ उजागर कर विकास क¨ गति प्रदान की है.
– एमके मिश्रा, रांची

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