दिल्ली में सीबीआइ के छापे पर इतना हंगामा न मचता, यदि सरकार लोकपाल बना देती. पीएमओ पर प्रतिशोध की राजनीति के आरोप भी नहीं लगते. आरोप-प्रत्यारोप संघीय ढांचे पे कुठाराघात है.
दिल्ली ही नहीं, सभी गैर भाजपा शाषित राज्यों को केंद्र से शिकायत है. लोगों को डराने के लिए सीबीआइ के इस्तेमाल में भाजपा कांग्रेस से आगे निकल गयी है. व्यापम घोटाला मामले में अब तक मध्यप्रदेश सचिवालय में छापा नहीं पड़ा. दिल्ली सचिवालय में जो छापा पड़ा है, वह वर्ष 2007 के शिक्षा विभाग में हुए भ्रष्टाचार से जुड़ा है.
पर संबंधित विभाग में छापामारी नहीं हुई. सोहराबुद्दीन एवं तुलसी प्रजापति हत्याकांड में अमित शाह बरी हो गये. असम के कांग्रेस नेता हिमंता विश्वशर्मा को सारधा चिटफंड घोटाला मामले में सीबीआइ से क्लीन चिट मिल गयी. कुछ ही दिनों बाद वह भाजपा में शामिल हो गये. तीस्ता सीतलवाड़ के पीछे सीबीआइ हाथ धोकर पड़ी है. फिर कैसे कहें कि सीबीआइ आजाद है.
– जंग बहादुर सिंह, गोलपहाड़ी
