हर माता-पिता की बस एक ही ख्वाहिश होती है, उसका बच्चा पढ़-लिख कर अच्छा इनसान बने. वह देश और समाज के काम आये. इसिलए अपने बच्चों को महंगे से महंगे स्कूल में दाखिला दिलाते हैं.
फीस के रूप में मोटी स्कूल को देते हैं. इसके लिए वे जी-तोड़ मेहनत करते हैं. इन स्कूलों में शिक्षा तो जैसी मिलती है, मिलती है, अभिभावक परेशान और कंगाल हो जाते हैं.
कभी ड्रेस, कभी पुस्तक, तो कभी वाहन किराये के रूप में उनसे मनमाना पैसा वसूला जाता है. प्रबंधन जब चाहे, किताबें बदल देता है, हर साल ड्रेस बदल देता है. वह भी बिना पूर्व सूचना के. अभिभावकों को चाहिए कि वे ऐसे स्कूलों की मनमानी के खिलाफ एकजुट होकर मोरचा खोलें. वे जब तक ऐसा नहीं करेंगे, स्कूलों की मनमानी चलती रहेगी.
– चिंटू सिंह राजपूत, सारठ
