वर्तमान समय में असहिष्णुता को लेकर व्यापक वाक युद्ध छिड़ा है. बहुत से शिक्षाविदों ने अपने पुरस्कार वापस कर अपना दुःख प्रकट किया, तो कई हस्तियों ने जुलूस व धरना देकर अपना विरोध जताया. दरअसल, आजादी के पहले भारत के महान स्वतंत्रता सेनानियों ने एक अखंड राष्ट्र बनाने का सपना संजोया था.
इसके लिए देश के लोगों ने सदियों तक अंगरेजों से लोहा लेने का काम किया. कई लोगों ने खुद को कुर्बान कर दिया, लेकिन सही मायने में देखा जाये, तो आज देश के नेताओं द्वारा विष वमन करने के बाद क्या हम अखंड राष्ट्र के सिद्धांत पर खरा उतर पाते हैं? कई धर्म, पंथ, संप्रदाय, वर्ग, जाति वाले देश में आपसी भाईचारे को बरकरार रखते हुए हमें सहिष्णुता का परिचय देना होगा.
– विकास कुमार महतो, ई-मेल से
