नाजमा खान
टीवी पत्रकार
पहाड़ों से नीचे उतर कर एक लंबी पगडंडी सी बहती गंगा. पानी का रंग कुछ हरा तो नीला. हवा में ताजगी के साथ पाकीजगी, जो ऋषिकेश आनेवालों को तरोताजा कर देती है. दिल्ली वालों का वीकेंड स्पॉट और देश के दूसरे हिस्सों से आनेवालों के लिए तीर्थयात्रा के दौरान पड़नेवाला एक पड़ाव… कुछ तो खास है इस जगह की ग्रैविटी में.
साठ के दशक में दुनिया में हिप्पी कल्चर यंगस्टर्स को अपनी तरफ खींच रहा था. इसी दौरान लिवरपूल (ब्रिटेन) का रॉक बैंड ‘बीटल्स’ भारत में कुछ तलाश रहा था. यह तलाश थी सुकून की. बुलंदी पर बैठे जिस बैंड की स्टिंग (तार) पर पूरी दुनिया नाच रही थी, वह खुद की तलाश में ऋषिकेश में महर्षि महेश योगी की शरण में आया था.
बैंड में चार लोग थे जॉन लेनन, पॉल मैकार्टनी, रिंगाे स्टार और जॉर्ज हैरिसन. लोगों को पागल बना देनेवाला संगीत गढ़ने में माहिर थे चारों. लेकिन फिर भी इन्हें लग रहा था कि कुछ कमी है, जिसे पूरा करने के लिए वे गंगा किनारे महर्षि महेश के आश्रम पहुंचे थे. यहां कुदरत के करीब रह कर उन्होंने जो संगीत आत्मसात किया, उसने उन्हें अमर कर दिया. इसी आश्रम को ‘बीटल्स आश्रम’ के नाम से भी जाना जाता है.
2003 में महर्षि महेश इस आश्रम को छोड़ कर चले गये, जिसके बाद यह आध्यात्मिक आश्रम वीरान-सा हो गया. लेकिन, बीटल्स के दीवाने यहां आते रहे और चोरी-छुपे इसके दरो-दीवारों और फूल-पत्तों में बसी बीटल्स की यादों को महसूस करते रहे. यह फैन्स की दीवानगी का ही असर था कि इस आश्रम को 8 दिसंबर को लेनन की बरसी के दिन खोल दिया गया. बीटल्स फैन्स को अब चोरी-छुपे नहीं, बेधड़क आने की इजाजत होगी.
करीब 18 एकड़ में फैला यह आश्रम नेशनल पार्क में स्थित है. यहां के ‘नेचर पाथ’ पर चलते हुए वाकई किसी दूसरी दुनिया में जाने का एहसास होता है. चिड़ियों की चुहल कानों को सुकून देती है.
पेड़-पौधों से गुजरती हवा की सरसराहट ऐसा माहौल बना देती है, जिसमें लगता है कि ये पेड़-पौधे आपस में गुफ्तगू कर रहे हैं और इन्हें रह-रह कर परेशान कर रही हैं गंगा, जो अपनी लहरों से शोर कर रही है. इस आश्रम में महर्षि महेश का साधना स्थल चौरासी कुटिया बेहद रहस्यमयी और खुद की तरफ खींचनेवाली है. इन्हीं में से कुछ में बीटल्स ने भी योग को साधा था. यह जगह वाकई किसी पौराणिक जगह की तरह लगती है, जिसे देख कर ये विचार बेशक रोमांचित कर जाते हैं कि बीटल्स ने कैसे मॉडर्न म्यूजिक और आध्यात्मिक माहौल को अपने गानों में पिरोया.
बीटल्स यहां करीब तीन महीने तक रुका और इस दौरान उसने 40 या 48 गाने लिखे, जिसमें से कुछ गानों ने बील्टस के फैन्स को दीवाना बना दिया. लेनन ने महर्षि पर भी एक गाना लिख डाला.
बैंड के सदस्यों ने अपने गानों में गहराई लाने के लिए शायद भारतीय वाद्ययंत्रों को भी सीखा. लेनन की बरसी पर खुला बील्टस आश्रम एक बार फिर से ‘पॉजिटिव एनर्जी’ के साथ तैयार है और दावत दे रहा है उन दीवानों को, जो गैजेट से लैस दौड़ती-भागती जिंदगी का हर लम्हा सोशल मीडिया पर ब्रॉडकास्ट कर रहे हैं, लेकिन अंदर से तन्हा है और खुद से ही लड़ कर आगे निकलने की होड़ को ही जिंदगी का नाम दे रहे हैं.
