कभी धर्म के नाम पर, कभी सामाजिक कायदे कानूनों की दलीलें दे कर, तो कभी वर्षों पुरानी संस्कृति का हवाला दे कर महिलाओं की उपेक्षा आज भी जारी है. किसी लड़की के यौन उत्पीड़न के बाद उसके पहनावे, चाल-चलन, चरित्र पर उंगली उठने लगती है. जैसे सभी सामाजिक अपराधों की जड़ वही है.
हाल ही में महाराष्ट्र के शिगनापुर शनि मंदिर में एक महिला द्वारा शनि भगवान की पूजा करने के बाद विवाद पैदा होना महिलाओं की उपेक्षा को दर्शाता है.
इस विवाद ने न सिर्फ महिलाओं की उपेक्षा पर बहस को गरमा दिया है, बल्कि इसका इशारा हमारी कुंठित सोच और समाज में वर्षों से स्थापित पुरुष प्रधान मानसिकता की तरफ भी है. यदि देश और समाज की सोच बदल जायेगी, तो महिला अपराध की संख्या में भी कमी आ जायेगी.
-शुभम श्रीवास्तव, ई-मेल से
