केंद्र और राज्य में अलग-अलग दलों की सरकार हो, तो दोनों के बीच तनातनी भारतीय राजनीति का ऐतिहासिक अनुभव रहा है. लेकिन, दिल्ली में वायु-प्रदूषण से निपटने में दिल्ली सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री के बीच का तालमेल जनहित के मसलों पर केंद्र और राज्य के बीच सहयोग व समर्थन के एक नये अध्याय की शुरुआत के संकेत जान पड़ता है.
दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा हासिल नहीं है. भूमि, आंतरिक सुरक्षा और निगरानी जैसे महत्वपूर्ण मसलों पर कोई कार्ययोजना लागू करनी हो, तो केंद्र या फिर केंद्र के प्रतिनिधि के रूप में उप-राज्यपाल की सहमति जरूरी है. कुछ अधिकारियों के पदस्थापन को लेकर दिल्ली सरकार और उप-राज्यपाल के बीच तकरार सामने आ चुकी है.
लेकिन, वायु-प्रदूषण के मसले पर पुरानी कटुता एकबारगी धुलती दिख रही है. सम और विषम अंकों वाली तारीखों को क्रमशः सम और विषम नंबर वाली कारें ही चलने के संबंध में दिल्ली सरकार की योजना के क्रियान्वयन में गृह मंत्रालय ने भरपूर सहयोग का वादा किया है. इस मसले पर गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुख्यमंत्री केजरीवाल की मुलाकात दोनों ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया से भरी थी.
जहां केजरीवाल और उनके मंत्रियों ने मरीज को अस्पताल ले जाने जैसी आपात-स्थितियों में नियम में छूट देने की गृह मंत्री की बात को जायज माना, वहीं गृह मंत्री ने योजना को लागू करने के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस-बल मुहैया कराने की बात मान ली. एक-दूसरे की चिंताओं के ऐसे आपसी स्वीकार से ही केंद्र और राज्य के संबंधों में नये अध्याय की शुरुआत हो सकती है. इसमें एक संकेत यह भी है कि मसला नागरिकों की सेहत का हो, तो दलगत तकरार को परे रख कर केंद्र एवं राज्य जनहित में साझा फैसला ले सकते हैं और सहयोगी बन सकते हैं.
दिल्ली में वायु-प्रदूषण नागरिकों की सेहत के लिए बेहद खतरनाक हो चुका है. आखिर दिल्ली हाइकोर्ट ने दिल्ली को ‘गैस-चैंबर’ जैसे यातनागृह की संज्ञा यों ही नहीं दी है. करीब पौने दो करोड़ की आबादीवाली दिल्ली में वाहनों की संख्या 40 लाख से ज्यादा है. यहां हवा में मौजूद धूलिकण और कार्बन डायआक्साइड की मात्रा खतरनाक स्तर तक पहुंच चुकी है. दिल्ली का आनंद विहार इलाका दुनिया के सर्वाधिक प्रदूषित जगहों में शामिल है.
अध्ययनों ने वायु-प्रदूषण को बच्चों में बढ़ती फेफड़े की बीमारी का प्रमुख कारण बताया है. उम्मीद की जानी चाहिए कि सेहत जैसे संवेदनशील मसले पर केंद्र और राज्य के बीच बना सहयोग जनहित के अन्य मसलों पर भी कायम रहेगा और सहयोग की राजनीति का विस्तार होगा.
