चेन्नई बाढ़ की चपेट में हैं. यह बाढ़ क्या चेन्नई में ड्रेनेज सिस्टम के अभाव का परिणाम है या पर्यावरण में आ रहे बदलावों के नतीजे? संयुक्त राष्ट्रसंघ की एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में अतिवृष्टि, अनावृष्टि, अतिगर्मी व अतिसर्दी जैसी घटनाओं में लगातार इजाफा हो रहा हैं, जो घातक परिणाम दे सकते हैं. ग्लोबल वार्मिंग से पर्यावरण, राजनीति, अर्थव्यवस्था, कृषि उत्पादन व जनजीवन भी प्रभावित है.
इसका जीता-जागता उदाहरण भारत में सूखा और पेरिस में आयोजित शिखर बैठक है, जहां सभी विकसित व विकासशील देशों के शासनाध्यक्ष इस समस्या के लिए एक दूसरे को जिम्मेदार ठहराते नजर आये. चेन्नई ही नहीं मुंबई, उत्तराखंड, कश्मीर या अन्य किसी भी राज्य में पानी की निकासी की सही व्यवस्था नजर नहीं आती. प्राकृतिक आपदा के बाद हम त्राहिमाम करने लगते हैं, लेकिन यदि पहले से इससे निबटने की तैयार कर लें, तो बहुत हद तक संकटों से छुटकारा मिल सकता है.
-अनुराग कुमार मिश्र, पटना
