प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति में झारखंड के पारा शिक्षकों के लिए 50% आरक्षण की व्यवस्था जी का जंजाल बन गया है. पूर्वाग्रह से ग्रसित पदाधिकारियों ने आरक्षण को परिभाषित करने का ऐसा पेच फंसाया कि पारा शिक्षक मानदंड पर कहीं खरा नहीं उतरते. झारखंड सरकार और नौकरशाहों की सोच के कारण पारा शिक्षक अदालत की शरण में हैं.
प्राथमिक शिक्षक नियमावली 2012 के अनुसार शिक्षक नियुक्ति में 50% के आरक्षण की व्यवस्था की गयी, लेकिन नयी सरकार व आला अधिकारियों ने 50% को सीट में तब्दील कर दिया है.
नतीजतन, पारा शिक्षकों के हिस्से की सीटें गैर-पारा टेट अभ्यर्थी के कोटे में चली गयीं. 60% से ज्यादा मेधांकवाले अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ दिया गया और कम अंक लानेवाले अभ्यर्थी को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है. अत: सरकार से आग्रह है कि वे इस नियमों को संशोधित कर दोबारा से नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करे.
-सुरेश प्रसाद वर्मा, कोवाड़, गिरिडीह
