जलवायु परिवर्तन आज एक गंभीर वैश्विक समस्या बन गयी है. इस पर चर्चा करने के लिए दुनिया के 190 देशों के प्रतिनिधियों ने पेरिस में भाग लिया. पहले भी जलवायु परिवर्तन की चिंताओं से जुड़े कई सम्मेलन हो चुके हैं, लेकिन इतनी चिंताओं के बावजूद स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हो सका है. इस मामले में विकसित देशों की ओर से हमेशा विकाशील देशों को ही दबाया जाता है. विकसित देशों के इस भेद-भावपूर्ण नीति से विकासशील देशों के आर्थिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना लाजिमी है.
पहले तो यह होना चाहिए कि विकसित देश दुनिया में दादागिरी करने के बजाय अपनी नीतियों में सुधार करते और फिर विकासशील देशों को नियमों का चरणबद्ध तरीके से पालन करने की गुजारिश करते. इसमें यह भी जरूरी होना चाहिए कि इस सम्मेलन में जो भी निर्णय किये जायें, उसे दुनिया के सभी देश अपने यहां लागू करें.
-शुभम श्रीवास्तव, ई-मेल से
