शांति, समृद्धि और आस्था का पर्व छठ

पृथ्वी के साक्षात देव दिनकर की आराधना के लिए छठ पूजा की जाती है. यह माना जाता है कि महाभारत काल में सूर्य की आराधना के बाद कुंती के गर्भ से कर्ण के जन्म के बाद से छठ पर्व का आयोजन किया जाता है. एक मान्यता यह भी है कि छठ देवी सूर्य देव की […]

पृथ्वी के साक्षात देव दिनकर की आराधना के लिए छठ पूजा की जाती है. यह माना जाता है कि महाभारत काल में सूर्य की आराधना के बाद कुंती के गर्भ से कर्ण के जन्म के बाद से छठ पर्व का आयोजन किया जाता है.

एक मान्यता यह भी है कि छठ देवी सूर्य देव की बहन हैं और उन्हीं को प्रसन्न करने के लिए जीवन के महत्वपूर्ण अवयवों में सूर्य व जल की महत्ता को मानते हुए, छठी माता को साक्षी मान कर भगवान सूर्य की आराधना की जाती है. मुख्य रूप से यह व्रत करने के पीछे सबसे बड़ा कारण आस्था के साथ सुख, समृद्धि और शांति के लिए पृथ्वी के साक्षात देव के समक्ष आराधना की जाती है. कभी बिहार और उत्तर प्रदेश की पहचान रहा यह पर्व, भारत के दूसरे प्रांतों सहित दुनिया के उन भागों में भी मनाया जाता है जहां की जड़ें बिहार से जुड़ी हैं

-चंद्रशेखर कुमार, खलारी

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