अपराध में नाबालिगों का प्रवेश

प्राचीन काल से ही हमारे देश की कानून व्यवस्था न्यायपूर्ण और सख्त रही है. उस समय अपराधी चाहे जिस किसी भी वर्ग या उम्र का हो, कानून सभी के लिए एक था और अपराधियों को सजा मिलती थी. आज हमारा देश प्रजातांत्रिक है और लोगों को बोलने और जीवन जीने की आजादी है. कानून में […]

प्राचीन काल से ही हमारे देश की कानून व्यवस्था न्यायपूर्ण और सख्त रही है. उस समय अपराधी चाहे जिस किसी भी वर्ग या उम्र का हो, कानून सभी के लिए एक था और अपराधियों को सजा मिलती थी. आज हमारा देश प्रजातांत्रिक है और लोगों को बोलने और जीवन जीने की आजादी है. कानून में भी कुछ लोगों को छूट मिली है. इसी छूट का फायदा उठा कर कुछ लोग अपराध की ओर कदम बढ़ा रहे हैं.
मसलन, हमारेदेश के कानून में बाल अपराधों के प्रति नरमी बरती गयी है और नाबालिग अपराधी को सुधरने के मौके प्रदान किये जाते हैं. उनके लिए अलग से बाल न्यायालय और सुधार गृह आदि की व्यवस्था की गयी है. इसके बावजूद कानून के लचीलेपन की वजह से हमारे देश में बाल अपराधियों की संख्या में वृद्धि ही हो रही है. आज स्थिति यह है कि देश में कई आपराधिक सरगना अपनी गरदन बचाने के लिए बालकों को जबरन अपराध की दुनिया में धकेलने का काम करते हैं. वास्तव में अपराध तो किसी खास आपराधिक सरगना द्वारा कराया जाता है, लेकिन अपराधी के रूप में नाबालिग ही सामने आता है.
इसका कारण भी सर्वविदित है. देश में संगठित रूप से आपराधिक वारदातों को अंजाम देनेवाले समूह का संचालक यह भली-भांति जानता है कि कम उम्र के बच्चों द्वारा अपराध को अंजाम दिये जाने के बाद उसकी गरदन बची रहेगी और साल-दो साल बाल सुधार गृह में रहने के बाद अपराध को अंजाम देनेवाला नाबालिग भी बाहर आ जायेगा. अपराध के इस छद्म रूप को भांपते हुए सरकार को एक ऐसा कानून बनाने की दरकार है, जो संगठित रूप से संचालित बाल अपराधों पर लगाम लगाये और उसके असली गुनाहगारों को सजा दिलाये.
-आस्था मुकुल, रांची

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