कबीर दास में कई दशक पहले कहा था, ‘साईं इतना दीजिए, जामे कुटुंब समाय. मैं भी भूखा ना रहूं, साधु न भूखा जाये.’ मगर आज लोग कबीर की इस पंक्ति को भूल गये हैं.
लोग धन के पीछे पागल हैं. उन्होंने अपने जीवन का उद्देश्य सिर्फ धन कमाना ही बना लिया है. इसके लिए वे कुछ भी करने से नहीं चूकते. यही कारण है कि आज हर ओर भ्रष्टाचार का बोलबाला है. यदि यही हाल रहा, तो वह दिन दूर नहीं जब हमारा देश इसमे भी नंबर वन हो जायेगा.
जीवन-यापन के लिए कितना धन चाहिए, यह हमारे नेताओं को सोचना चाहिए. गांधी की बात करनेवाले क्या ये नहीं जानते कि बापू ने कभी कोई पद ग्रहण नहीं किया. अपने आप को जनता का सेवक बतानेवाले ये कैसे भूल जाते हैं कि एक आम आदमी का जीवन स्तर कितना निम्न है.
– रिक्की निशांत, मधुपुर
