झारखंड में पंचायत चुनाव होनेवाले हैं. अभी हाल ही में उत्तरप्रदेश में भी पंचायत चुनाव हुए और वहां के नतीजे भी आ गये. यह विडंबना ही है कि वहां जितने भी प्रत्याशी जीते हैं, उनमें से ज्यादातर को सामान्य ज्ञान की भी जानकारी नहीं है.
एक खबरिया चैनल ने कुछ विजेताओं से सामान्य ज्ञान की परीक्षा ली, जिसमें ज्यादातर विफल रहे. कुछ प्रत्याशियों को तो वहां के मुख्यमंत्री का नाम भी पता नहीं. सवाल यह पैदा होता है कि जिस व्यक्ति को अपने मुख्यमंत्री के नाम नहीं पता, वह योजनामद की राशि और विकास कार्यों का कितना ब्योरा रख सकेगा.
महात्मा गांधी पंचायती राज के पक्षधर थे, लेकिन जब देश में ऐसे अशिक्षित लोग पंचायतों के मुखिया बनेंगे, तो पंचायतों का बंटाधार होना तय ही है. उत्तर प्रदेश के पंचायतियों से सीख लेते हुए ही झारखंड के मतदाताओं को विवेक के साथ अपना नेता चुनना होगा.
-अक्षय कुमार, देवघर
