कन्या भ्रूण हत्या पर सभी लोग उपदेश तो देते हैं, लेकिन कोई इसके मुख्य कारणों पर नहीं बोलता. सही मायने में भारतीय समाज में प्रचलित दहेज प्रथा कन्या भ्रूण हत्या कराने के लिए अभिभावकों को मजबूर कर रही है. हमारे देश का कोई भी नागरिक यह नहीं चाहता कि वह भ्रूण में ही अपनी बेटियों को मार दे, लेकिन दिमाग में दहेज की राशि का ध्यान आते ही उसकी रूह कांप जाती है.
हालांकि, जिन अभिभावकों की बेटियां हैं, वे उनकी पढ़ाई-लिखाई और लालन-पालन पर लड़कों के समान ही खर्च करते हैं, लेकिन लाडली की शादी में मांगे जानेवाले दहेज की चिंता उन्हें भी सताती है. सबसे अहम बात यह है कि सिर्फ भ्रूण हत्या और दहेज प्रथा पर लंबा भाषण देने भर से ही काम नहीं चलेगा. इसके लिए सबसे पहले हमारे समाज से दहेज प्रथा को समूल खत्म करना होगा. ऐसा तभी संभव है, जब अपनी इच्छाशक्ति को दृढ़ करेंगे.
-रणधीर कुमार, ई-मेल से
