भोजन की बरबादी और भुखमरी

संयुक्त राष्ट्र संघ के कृषि और खाद्य संगठन की एक मुहिम के तहत प्रतिवर्ष 16 अक्तूबर को विश्व खाद्य दिवस मनाया जाता है. इस साल भी मनाया गया. इसका उद्देश्य विश्व के विकासशील देशों में व्याप्त कुपोषण व भुखमरी की समस्या से निजात दिलाने तथा खाद्य सुरक्षा के प्रति लोगों में जागरूकता का प्रचार-प्रसार करना […]

संयुक्त राष्ट्र संघ के कृषि और खाद्य संगठन की एक मुहिम के तहत प्रतिवर्ष 16 अक्तूबर को विश्व खाद्य दिवस मनाया जाता है. इस साल भी मनाया गया. इसका उद्देश्य विश्व के विकासशील देशों में व्याप्त कुपोषण व भुखमरी की समस्या से निजात दिलाने तथा खाद्य सुरक्षा के प्रति लोगों में जागरूकता का प्रचार-प्रसार करना है.
भूख, गरीबी और कुपोषण आज वैश्विक समस्या बन चुके हैं. विश्व में आज करोड़ों लोग भुखमरी व कुपोषण से ग्रस्त हैं. दिनोंदिन बढ़ती जनसंख्या तथा घटते कृषिगत उत्पादन से निकट भविष्य में इसके विकराल होने की संभावना है, जिससे इसके समूल खात्मे का स्वप्न धराशायी हो सकता है.
भारत भी इस विपदा से अछूता नहीं है. चीन के बाद खाद्यान्न उत्पादन में दूसरा स्थान हासिल करने के बाद भी देश में खाद्यान्नों के उचित प्रबंधन के अभाव में प्रतिवर्ष लाखों टन अनाज सड़ जाते हैं. हालांकि, हमारे देश में खाद्य सुरक्षा विधेयक और भोजन के अधिकार को लेकर गाहे-बगाहे चर्चा होती रहती है, लेकिन ये चर्चा आज तक धरातल पर उतर नहीं पायी है. दुखद यह है कि इस मुद्दे पर केवल राजनीति ही हुई है.
एक तरफ देश में करोड़ों लोग भूखे पेट सोने को मजबूर हैं, तो दूसरी तरफ विवाह, पूजा जैसे अन्य आयोजनों में प्रतिदिन अनाज कका एक बड़ा भाग व्यर्थ हो जाता है. भोजन की बर्बादी के प्रति हम सचेत नहीं हैं.
हमारा छोटा-सा प्रयास कई भूखे लोगों के पेट की आग बुझा सकता है, लेकिन इसकी फिक्र किसी को नहीं. घर में बना हुआ खाना सड़ जाये, तो अच्छा है, लेकिन सड़ने से पूर्व से उसे किसी जरूरतमंद लोगों को देने की जरूरत को हम गंभीरता से नहीं लेते. आज जरूरत है साझा प्रयास करने की, ताकि देश से भूख और कुपोषण को बाहर किया जा सके.
– सुधीर कुमार, राजाभीठा, गोड्डा

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