हमारे देश भारतवर्ष में अनेक संत-महात्माओं ने जन्म लिया है. इस देश की धरा इसलिए पावन है कि यहां पर ऐसे संत और महापुरुषों ने जन्म लिया है, जिन्होंने न केवल देश का मान बढ़ाया है, बल्कि समय-समय पर जरूरत पड़ने पर देश के लोगों का मार्गदर्शन भी किया है. इनमें से ही एक थे गुरुनानक देव. वे अपने शिष्यों को धर्म-कर्म की शिक्षा देते थे. वे स्वयं सत्संग करते थे और अपने शिष्यों को भी सत्संग करने की प्रेरणा देते थे.
अपने शिष्यों से वे कहा करते थे कि नेक काम करो. घमंड मत करो. सबकी भलाई में ही अपनी भलाई मानो. गुरुनानक बचपन से ही भक्त स्वभाव के थे. किसी प्रकार की समस्या आने पर लोग गुरुनानक देव के पास आते और उनसे अपनी बात कहते थे. गुरुनानक उनकी कठिनाई दूर करने में उनकी सहायता करते थे. गुरुनानक एक दिन राजा कारू के दरबार में गये. कारू ने उनका स्वागत किया.
नानक देव ने कारू से कहा, लो, यह सूई अपने खजाने में जमा कर लो. इसे अगले जन्म में ले लूंगा. कारू ने हंसते हुए कहा, महात्मन मजाक कर रहे हैं क्या? अगले जन्म में हमारी आपकी भेंट होगी, यह अनिश्चित है. इसलिए इस सूई को रखना ठीक न होगा. नानकदेव ने कहा, ठीक, बिल्कुल ठीक. इसी प्रकार तुम्हारा रखा हुआ धन भी अगले जन्म में तुम्हें प्राप्त होगा, यह निश्चित नहीं है.
इसके विपरीत यह निश्चित है कि यह तुम्हें नहीं मिलेगा. इसलिए इसे प्रजा के हित में लगा कर पुण्य कमाओ. गुरुनानक की बातों का प्रभाव राजा कारू पर पड़ा. अब वह प्रजा के हित में धन खर्च करने लगा. सबके हित में काम करना ही खरा साैदा है, इसमें संदेह नहीं. आज के शासकों भी इससे सीख लेनी चाहिए और प्रजा के हित में ही काम करना चाहिए, क्योंकि जनता का हित ही श्रेयस्कर है.
मुकेश कुमार, विबायान, औरंगाबाद
