कन्नड़ लेखक कुलबर्गी की हत्या के विरोध में अब तक देश के लगभग 25 लेखकों ने साहित्य अकादमी का पुरस्कार लौटा दिया है. उन्होंने आरोप लगाया है कि सरकार इस घटना के प्रति उदासीन है.
नयनतारा सहगल, अशोक वाजपेयी और प्रसिद्ध कवि मंगलेश डबराल समेत दर्जनों लेखकों ने पुरस्कार लौटा कर सरकार के प्रति प्रतिरोध जताया है. सवाल उठता है कि क्या साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटा देना ही समस्या का हल है? लेखक अपनी लेखनी से भी क्रांति के बीज बो सकते थे. उन्हें अपनी रचनाशीलता से समस्या का हल ढूढ़ना चाहिए था.
क्या यह पुरस्कार भारत की सरकार देती है? वास्तव में, कोई सरकार यह पुरस्कार नहीं देती, बल्कि लेखकों द्वारा निर्वाचित स्वायत्त संस्था साहित्य अकादमी यह पुरस्कार देती है. 1984 का सिख दंगा, बाबरी विध्वंस व कश्मीर में हिंदुओं के नरसंहार के विरुद्ध आखिर किसी लेखक ने सम्मान क्यों नही लौटाया?
– चंद्रशेखर कुमार, खलारी
