किसानों की तबाही

पंजाब में पिछले कुछ दिनों से जारी किसानों का रेल रोको आंदोलन जोर पकड़ रहा है. राज्य से गुजरनेवाली ट्रेनें ठप हैं. राज्य में सफेद मक्खियों के हमले ने कपास की फसल तबाह कर दी है. बर्बादी का आकलन 42 सौ करोड़ रुपये से अधिक का है. किसानों ने फसल बचाने के लिए करीब 150 […]

पंजाब में पिछले कुछ दिनों से जारी किसानों का रेल रोको आंदोलन जोर पकड़ रहा है. राज्य से गुजरनेवाली ट्रेनें ठप हैं. राज्य में सफेद मक्खियों के हमले ने कपास की फसल तबाह कर दी है. बर्बादी का आकलन 42 सौ करोड़ रुपये से अधिक का है. किसानों ने फसल बचाने के लिए करीब 150 करोड़ रुपये के कीटनाशकों का प्रयोग किया, पर ज्यादातर कीटनाशक नकली थे.
यहां तक कि सरकार द्वारा उपलब्ध कराये गये कीटनाशक भी बेअसर साबित हुए. तबाही के कारण 15 किसान आत्महत्या कर चुके हैं. राज्य सरकार ने 640 करोड़ रुपये मुआवजा देने का ऐलान किया है, पर किसान इसे तबाही के मुकाबले बहुत कम मान रहे हैं. किसानों की चिंता यह भी है कि सफेद मक्खियां अन्य फसलों को भी तबाह कर सकती हैं. इस तबाही ने राज्य में किसानी के संकट को और गहरा कर दिया है. पंजाब हरित क्रांति का अगुआ राज्य रहा है.
राज्य में कृषि के विकास का ही नतीजा है कि बिहार, झारखंड समेत कई राज्यों से हजारों लोग खेती में रोजगार के लिए पंजाब का रुख करते रहे हैं. लेकिन इक्कीसवीं सदी की शुरुआत से ही यहां के किसानों की मुश्किलें कई स्तरों पर बढ़ने लगी, जिसके प्रति राज्य सरकार का रवैया ढुलमुल ही रहा है. एक सर्वेक्षण के अनुसार 2000 से 2010 के बीच राज्य में करीब सात हजार किसानों ने खुदकुशी की थी. यह विडंबना ही है कि उन्नत तकनीक का उपयोग और बाजार की उपलब्धता के बावजूद पंजाब के किसान त्रासद दौर से गुजर रहे हैं.
यह समस्या देश के व्यापक कृषि संकट से जुड़ी है. बीटी कॉटन जैसे जेनेटिकली मोडिफाइड फसलों के बारे में चिंताओं को दरकिनार कर उसे किसानों पर थोपा तो जा रहा है, पर उसके लिए सही बीज और पर्याप्त कीटनाशकों की व्यवस्था सरकार नहीं कर रही. पंजाब के अलावा आंध्र प्रदेश, तेलांगाना और महाराष्ट्र में भी किसान खेती बचाने की कोशिश में कर्ज में डूबते चले जा रहे हैं.
आत्महत्याओं का बड़ा कारण यही है. बाजार में उपलब्ध बीजों, कीटनाशकों और फर्टिलाइजर की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सक्षम तंत्र नहीं होने के कारण धांधली करनेवाले और नकली सामान बेचनेवालों की चांदी हो जाती है. अक्सर उन्हें राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण भी हासिल होता है. आवश्यकता इस बात की है कि केंद्र और राज्य सरकारें कृषि संकट पर ठोस नीतिगत पहल करें, ताकि पंजाब सहित पूरे देश के किसानों को बर्बादी से बचाया जा सके.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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