काश! गरीबी मिटाने का होता प्रयास

भारत देश एक ऐसा देश है, जहां धर्म समुदाय कि इतनी विविधताएं पायी जाती हैं. भारत जैसी विविधताएं पूरे संसार में और कही नहीं पायी जातीं. फिर भी युग-युगों से लोग आपस में प्रेमभाव के साथ रहते आये हैं. वर्ष के 365 दिनों पर गौर करें, शायद ही कोई ऐसा दिन हो, जब देश के […]

भारत देश एक ऐसा देश है, जहां धर्म समुदाय कि इतनी विविधताएं पायी जाती हैं. भारत जैसी विविधताएं पूरे संसार में और कही नहीं पायी जातीं. फिर भी युग-युगों से लोग आपस में प्रेमभाव के साथ रहते आये हैं.
वर्ष के 365 दिनों पर गौर करें, शायद ही कोई ऐसा दिन हो, जब देश के किसी कोने में धार्मिक उत्सव या फिर पूजा-पाठ का आयोजन न किया जाता हो. यही कारण है कि हमारा देश एक धार्मिक देश कहलाता है. आस्था यहां के रगों में बसी है, लेकिन आज हमारे देश में धार्मिक आयोजन दिखावा बन गये हैं. धार्मिक आयोजनों के नाम पर चंदे बटोरे जाते हैं.
पहले और आज के आयोजनों में फर्क यही है कि आज पूजा पंडाल को लेकर जितना चंदा बटोरा जाता है. कोई श्रद्धा से दिया तो ठीक और अगर नहीं दिया तो जबरन भी वसूली की जाती है. यदि सामाजिक सरोकार के लिए ऐसे कार्य किये जाते, तो देश में गरीबी का पता नहीं चलता. लोगों को इस दिशा में भी विचार करना चाहिए.
– हरिश्चंद्र महतो, बेलपोस

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >