क्या घर में नहीं सुलझता घरेलू मसला?

उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री आजम खान ने दादरी मसले को संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव के समक्ष प्रस्तुत कर देश की संप्रभुता का उल्लंघन किया है. देश के किसी भी मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने का अिधकार िसर्फ विदेश मंत्रालय को है. इसके लिए हमारे देश में पर्याप्त अिधकार संपन्न मानवािधकार आयोग और […]

उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री आजम खान ने दादरी मसले को संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव के समक्ष प्रस्तुत कर देश की संप्रभुता का उल्लंघन किया है. देश के किसी भी मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने का अिधकार िसर्फ विदेश मंत्रालय को है.
इसके लिए हमारे देश में पर्याप्त अिधकार संपन्न मानवािधकार आयोग और त्रिस्तरीय न्यायालय है. दुर्भाग्यपूर्ण घटना की तमाम राजनीतिक दलाें ने निंदा की है और दादरी के पीिड़त परिवार से जाकर मुलाकात भी की है.
आजम साहब को पहले यह सोच लेना चाहिए था कि इस देश को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र का दर्जा प्राप्त है. ऐसा करने से देश की धर्मनिरपेक्षता पर सवाल खड़ा हो सकता है. सबसे बड़ी बात यह है कि जिस मसले का हल देश में ही निकाला जा सकता था, उसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने की जरूरत ही क्या थी? क्या इसे घर में ही सुलझाने का प्रयास नहीं किया जा सकता था. या फिर यह पब्लिसिटी स्टंट है.
-सूरज कुमार, रांची

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