संस्कृति ही हमारी पहचान है

हम भारतीय अपनी सभ्यता-संस्कृति के लिए जाने जाते हैं, ऐसे में इनका अनुसरण करना हमारा कर्तव्य है. दुनिया के अन्य देशों में भी वहां के लोग एवं सरकारें अपने ही देश के संस्कार, भाषा, सभ्यता, शिक्षा आदि को ही महत्व देते हैं. इसके विपरीत हमारे देश में लोग पाश्चात्य देशों की नकल करने में जुटे […]

हम भारतीय अपनी सभ्यता-संस्कृति के लिए जाने जाते हैं, ऐसे में इनका अनुसरण करना हमारा कर्तव्य है. दुनिया के अन्य देशों में भी वहां के लोग एवं सरकारें अपने ही देश के संस्कार, भाषा, सभ्यता, शिक्षा आदि को ही महत्व देते हैं. इसके विपरीत हमारे देश में लोग पाश्चात्य देशों की नकल करने में जुटे हैं.
आज देश में शिक्षा, चिकित्सा, जीवनशैली और यहां तक कि भाषा भी अंगरेजों की व्यवस्थाओं पर ही चल रही है.वास्तव में हमारे ऋषियों ने प्राचीन काल में जो गहन चिंतन व शोध से जो विधाएं बतायी थीं, वह पूरे विश्व में सर्वश्रेष्ठ थीं. देश की स्वर्णिम युग व्यवस्था को वापस लाने के लिए हमें दोबारा उन्हें अपनाना होगा. इसके लिए हमें सामाजिक और धार्मिक स्तर पर प्रयास करने होंगे.
– ज्ञानदीप जोशी, रांची

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