किताबों से दूर होती देश की युवा पीढ़ी

पुस्तकें मात्र ज्ञान वर्द्धन के लिए जरूरी नहीं होतीं, बल्कि वे हमारी कल्पना और वैचारिक शक्ति को भी बढ़ाती हैं. यह जानकर निराशा होती है कि आज का युवा वर्ग पुस्तकों से दूर होता जा रहा है. टीवी, स्मार्टफोन, वीडियो गेम, इंटरनेट आदि का अत्यधिक उपयोग युवाओं की प्राथमिकता बन गयी है. इससे युवा पीढ़ी […]

पुस्तकें मात्र ज्ञान वर्द्धन के लिए जरूरी नहीं होतीं, बल्कि वे हमारी कल्पना और वैचारिक शक्ति को भी बढ़ाती हैं. यह जानकर निराशा होती है कि आज का युवा वर्ग पुस्तकों से दूर होता जा रहा है.
टीवी, स्मार्टफोन, वीडियो गेम, इंटरनेट आदि का अत्यधिक उपयोग युवाओं की प्राथमिकता बन गयी है. इससे युवा पीढ़ी की स्मृति क्षमता, कल्पनाशक्ति, वैचारिक दृढ़ता व आत्मबल आदि में कमी आ रही है. आज की शिक्षा नीति भी इसके लिए जिम्मेदार है.
सृजनशक्ति के विकास में विद्यालयों और शिक्षकों की अहम भूमिका रहती है, पर अफसोस छोटे-छोटे बच्चों को भी इंटरनेट पर आधारित होमवर्क या प्रोजेक्ट दिये जा रहे हैं. पढ़ाई करने का उद्देश्य ही सिर्फ पैसा कमाना हो गया है. इसीलिए बच्चे कमाने के लिए पढ़ाई कर रहे हैं. सिलेबस के अलावा, पुस्तक पढ़ने की आदत बहुत कमी है.
– मनोज आजिज, जमशेदपुर

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