कब उठेगा नेताजी के रहस्य से पर्दा?

आजादी के 68 वर्षों के बाद भी स्वतंत्रता संग्राम के हीरो और भारत का फरिश्ता नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत की गुत्थी न सुलझना अपने आप में एक पहेली है. आज तक देश के लोगों को यह समझ में नहीं आया है कि आखिर वह कौन सी ताकत है, जो इस पहेली को सुलझने […]

आजादी के 68 वर्षों के बाद भी स्वतंत्रता संग्राम के हीरो और भारत का फरिश्ता नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत की गुत्थी न सुलझना अपने आप में एक पहेली है. आज तक देश के लोगों को यह समझ में नहीं आया है कि आखिर वह कौन सी ताकत है, जो इस पहेली को सुलझने नहीं दे रही है. क्या हमारे देश के शासकों के हाथ बंधे हुए हैं?
यदि कोई भी ताकत इस रहस्य से पर्दा उठाने से नहीं रोक रही है, तो पंिडत जवाहर लाल नेहरू से लेकर अब तक देश के प्रधानमंत्रियों ने इस नेक काम को करने का साहस क्यों नहीं दिखा पाया? क्या अंगरेजी हुकूमत ने आज भी हमारे हाथों को बांध रखा है? इसके साथ ही, एक सवाल यह भी है कि यदि नेताजी किसी षड़यंत्र के शिकार हुए हैं, तो इसकी जांच होनी चाहिए.
अभी तक मीडिया में आयी खबरों के मुताबिक सुभाष चंद्र बोस की मौत किसी विमान दुर्घटना में नहीं हुई है. यदि एेसा है, तो भारत को आजादी मिलने के बाद भी उन्हें देश में प्रवेश क्यों नहीं करने दिया गया? दूसरी बात यह कि वे जब तक जिंदा रहे, तब तक उन्हें गुमनामी की जिंदगी जीने के लिए विवश क्यों किया गया? नेताजी के जिंदा होने का साक्ष्य ताइवान सरकार या फिर उनके कार चालक के पास है. कार चालक उन्हें उस देश की सीमा तक छोड़ कर आया था. इसका मतलब यह है कि उनकी मौत किसी दुर्घटना में नहीं हुई.
ताज्जुब तो इस बात से भी है कि देश के किसी भी संगठन ने इस रहस्य के खुलासे के लिए सरकार पर दबाव नहीं बनाया. अभी दो-तीन दिन पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कुछ दस्तावेजों को सार्वजनिक किया है, लेकिन वे भी साक्ष्य के तौर पर माकूल नहीं हैं. यदि अब इससे पर्दा नहीं उठता है, तो आखिर कब उठेगा?
बैजनाथ प्रसाद महतो, बोकारो

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